राजा का बकरा एक बच्चो के लिए बहुत ही अच्छी और प्रेरणादायक हिंदी कहानी है।
एक राजा के पास बहुत बहुत ही सुंदर बकरा था। वह राजा अपने बकरे को बहुत प्यार करता था। एक दिन राजा ने अपने राज्य में घोषणा करवा दिया कि जो कोई भी व्यक्ति उसके बकरे को घास खिलाकर तृप्त करेगा, उसे उपहार में हजार स्वर्ण मुद्राएं दी जायेंगी। बकरा घास खाकर तृप्त हुआ या नहीं, इसकी परीक्षा राजा स्वयं करेंगे।
इस घोषणा सुनने के बाद राज्य के काफी लोग यह सोच रहे थे कि ये कौन सा बड़ा काम है। बकरे को भर पेट घास ही तो खिलाना है, इसे तो कोई भी कर देगा। ये सोचकर बहुत बड़ी संख्या में लोग राज महल पहुंच गये। लोगों ने बारी-बारी से बकरे को घास खिलाकर तृप्त करने की कोशिश की, लेकिन बकरा लोगो का दिया हुआ घास खाने के बाद जैसे ही राजा के पास जाता तो राजा उसके सामने और घास रख देते, और बकरा वह घास भी खाने लगता। काफी लोग इस काम में असफल हो गए। सभी लोग अब ये मान चुके थे कि इस प्रतियोगिता को तो कोई भी जीत नहीं सकता।

उसी राज्य में एक बुढ़ा आदमी लेकिन बहुत बुद्धिमान था। वह भी बकरे को तृप्त करने के लिए राजमहल पहुंच गया। उसने बकरे को अपने साथ लिया और जंगल में ले गया। पहले तो उसने बकरे को पेटभर घास खिला दी। इसके बाद बकरा जैसे ही घास खाने की कोशिश करता तो बूढ़ा आदमी उसे डंडे से मारने लगता। ऐसा ही करते-करते सुबह से शाम हो गयी। बकरा ये समझ गया कि अगर मैंने घास खाने की कोशिश की तो मुझे मार पड़ेगी।
शाम को बूढ़ा उस बकरे को लेकर राजा के पास गया। राजा ने तुरंत ही बकरे के सामने घास रख दी। बकरे ने सोचा कि अगर घास खायी तो फिर से मार पड़ेगी। ये सोचकर उसने घास की तरफ देखा तक नहीं। राजा भी हैरान थे कि ये कैसे संभव हो गया, लेकिन शर्त के मुताबिक उस बूढ़े आदमी को राजा ने हजार स्वर्ण मुद्राएं उपहार में दे दी गयीं।
इस कहानी से सीख : इस हिंदी कहानी से हमे ये सीख मिलती है कि हमारे जीवन में समस्या कोई भी हो, उसका हल जरूर है। बस जरूरत है थोड़ा अलग सोचने की। बुद्धिमान बूढ़े आदमी ने थोड़ा अलग सोचा और बकरे को तृप्त करने की प्रतियोगिता जीत ली। इसी तरह किसी भी समस्या में धैर्य से काम लेना चाहिए और थोड़ा अलग सोचने से कोई न कोई रास्ता जरूर मिल जाता है।
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