यह हिंदी कहानी “मेहनत का फल”, एक छोटे से गांव में रहने वाली नेहा नाम की लड़की की है, जिसे पढ़ाई का बहुत शौक था। उसके घर की हालत बिगड़ने के बाद भी हार नहीं मानी और अपनी पढाई को पूरी कर एक शिक्षिका बनी।
एक छोटे से गांव में नेहा नाम की एक लड़की रहती थी। नेहा बचपन से ही एक बहुत ही होशियार और मेहनती लड़की थी। नेहा के पिता एक किसान थे, जो दिन-रात खेतों में काम करते थे। नेहा को पढ़ाई करने का बहुत शौक था। लेकिन नेहा के घर की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी कि उसके माता- पिता उसकी पढ़ाई का खर्च उठा सकें।
एक दिन नेहा के पिता बीमार पड़ गये। घर की हालत और बिगड़ने लगी। नेहा की पढ़ाई पर संकट आ गया।
एक दिन नेहा की मां ने नेहा से कहा- ‘बेटी, अब तुम्हें पढ़ाई छोड़नी होगी। घर के हालात ऐसे नहीं हैं कि हम तुम्हारी पढ़ाई का खर्च उठा सकें।’
नेहा ने मां से कहा- ‘मां, मैं हार नहीं मानूंगी. मैं अपनी पढ़ाई खुद करूंगी और आपको सहारा दूंगी.’
नेहा ने अपने गांव के पास की एक छोटी-सी दुकान में काम करना शुरू कर दिया। नेहा अब रोज सुबह जल्दी उठकर दुकान जाती और फिर स्कूल जाती। वह रात को पढ़ाई करती और अपने हर परीक्षा में अच्छे अंक लाती। उसकी मेहनत और लगन को देखकर उसके शिक्षक ने भी उसकी मदद करने का फैसला किया।
शिक्षक ने नेहा के स्कूल की फीस माफ करवा दी और उसे पढ़ाई के लिए जरूरी किताबें भी दीं। इसके बाद जब फाइनल परीक्षा हुई तो नेहा ने स्कूल में टॉप स्थान प्राप्त किया। उसकी मेहनत को देखकर गांव के सरपंच ने उसे आगे की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति दिलवा दी।
इस तरह नेहा ने उच्च शिक्षा पूरी की और फिर एक दिन शिक्षिका बन गयी। अब वह गांव के बच्चों को मुफ्त में पढ़ाती थी ताकि कोई भी बच्चा अपनी शिक्षा से वंचित न रहे।
कहानी से सीख: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि कड़ी मेहनत का फल हमें मिलता ही हैं। हमें कठिनाइयों से भागने के बजाय उनका डटकर सामना करना चाहिए।