Namaskar Dosto, Is post me hum ek aur hindi moral story “भलाई का फल” likh rahe hai. Ummid hai aap logo ko ye hindi kahani bhi aur hindi kahaniyon ki tarah achhi lagegi. Aisi hi aur achhi achhi moral kahaniyon ke liye hamari website HindiMoralStory ko hamesha visit kare.
भलाई का फल : Hindi Moral Story
एक गांव में मोहन नाम का एक गरीब किसान रहता था। मोहन एक बहुत ही मेहनती और दयालु आदमी था। वह मानता था कि सच्चे मन से की गई भलाई कभी बेकार नहीं जाती। मोहन रोज सुबह जल्दी उठकर अपने खेतों में काम करता और जो भी फसल उगती, उसे गांव में बेचकर अपना जीवनयापन करता था।
एक दिन जब मोहन अपने खेत में हल चला रहा था, तो उसने देखा कि एक घायल कबूतर जमीन पर पड़ा हुआ था। मोहन को उस कबूतर को घायल अवस्था में देख कर दया आ गयी और उसने कबूतर को उठाकर अपने घर ले आया। मोहन ने उस कबूतर की अच्छी देखभाल की, उसके घाव के उपर दवा लगायी और उसको खाने के लिए दाना-पानी दिया। कुछ दिनों में कबूतर सेहतमंद हो गया और उड़ने लायक हो गया।
जब कबूतर पूरी तरह से ठीक हो गया, तो उड़ने से पहले उसने मोहन की झोपड़ी के ऊपर कुछ देर चक्कर लगाया और फिर उड़ गया। मोहन मुस्कुराया और अपने काम में लग गया। उसने इस बारे में ज्यादा नहीं सोचा।
कुछ दिनों के बाद एक दिन सुबह मोहन अपने खेतों में काम कर रहा था कि उसने अपने घर के आंगन में एक चमकती हुई पोटली देखी। मोहन ने उस पोटली खोलकर देखा तो वह दंग रह गया, उसमें सोने के सिक्के थे। मोहन को समझ में नहीं आया कि यह किसने रखा होगा…
मोहन सिक्के की पोटली लेकर गांव के मुखिया के पास गया और पूरी बात बतायी। मुखिया ने कहा- ‘मोहन, यह तुम्हारे अच्छे कर्मों का फल है। शायद जिस कबूतर की तुमने मदद की थी, वही तुम्हें इनाम दे कर गया है।’
मोहन बहुत खुश हुआ लेकिन उसने एक और निर्णय किया कि इन सिक्कों का उपयोग वह अपने गांव के लोगों की भलाई के लिए करेगा। मोहन ने गांव में एक छोटा स्कूल और कुआं बनवाया, जिससे गांव के सभी लोगों का फायदा हुआ।
इस हिंदी कहानी से शिक्षा : भलाई का फल अच्छा ही मिलता है। किसी का भला करो तो वो कभी बेकार नहीं जाता और सच्ची सेवा का फल ज़रूर मिलता है।
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