ये हिंदी कहानी “मां की ममता” एक अच्छी सी कहानी है जो मां और बेटे के प्यार और त्याग की कहानी है। आइये शुरू करते है इस कहानी को…
रीना और उसका बेटा राजू
एक छोटे से गांव में रीना नाम की एक महिला रहती थी। वह अपने बेटे राजू के साथ उस गांव में रहती थी। रीना के पति की एक हादसे में मृत्यु हो चुकी थी और अब राजू ही उसकी दुनिया थी। रीना अपना घर चलाने के लिए सिलाई का काम करती थी। और वह दिन- रात मेहनत करके राजू को पढ़ाती थी।
रीना की इच्छा
रीना की इच्छा थी कि राजू पढ़-लिखकर बहुत बड़ा आदमी बने और जीवन में सफल हो। एक दिन राजू ने अपनी माँ से स्कूल में नये जूते पहनकर जाने की इच्छा जतायी। रीना जानती थी कि उसके पास ज्यादा पैसे नहीं हैं, लेकिन फिर भी उसने अपने गहने गिरवी रखकर राजू के लिए नये जूते खरीद दिये।
जब राजू ने जूते को देखा तो वह बहुत खुश हुआ और अपनी माँ से बोला- ‘मां, ये जूते तो बहुत महंगे लग रहे हैं। आपने इन्हें कैसे खरीदा?’
रीना ने मुस्कुराते हुए कहा- ‘बेटा, मां के लिए तेरी खुशी ही सबसे बड़ी दौलत है।’
राजू का अपनी माँ से वादा
राजू की आंखों में आंसू आ गये। उसने अपनी मां के हाथ पकड़ लिए और कहा- ‘मां, मैं बड़ा होकर आपको हर खुशी दूंगा।’
समय बीतता गया। राजू बहुत मेहनत से पढ़ाई की और एक बहुत बड़ा अफसर बन गया। अब रीना को अपने बेटे पर गर्व था।
एक दिन राजू ने मां से कहा- ‘मां, अब तुम्हें काम करने की ज़रूरत नहीं है। अब मैं तुम्हारा ख्याल रखूंगा।’
रीना ने बड़े प्यार से कहा- ‘बेटा, मैं तो तब से खुश हूं, जब तूने पहली बार मेरी आंखों में खुशी देखी थी।’
राजू ने मां के पैर छुए और कहा- ‘मां, आपने मेरे लिए जो त्याग किया है, उसका कर्ज मैं कभी नहीं चुका सकता।’
इस कहानी से सीख : मां का प्यार और त्याग निस्वार्थ होता है। जीवन में सफलता के पीछे मां के आशीर्वाद और उसके त्याग का बहुत बड़ा योगदान होता है।
उम्मीद है कि आपको ये हिंदी कहानी “मां की ममता” काफी अच्छी लगी होगी। ऐसी ही और कहानी के लिए HindiMoralStory.com विजिट करे।
कुछ और कहानियां:
- नीलू का जादुई पौधा
- ईमानदारी का इनाम
- कंजूस दर्जी और उसकी पत्नी की कहानी
- भलाई का फल
- सच्ची बहादुरी की कहानी