हेलो मेरे प्यारे दोस्तों , आज मै आपलोगो के लिए चींटी और कबूतर की एक बहुत ही सुन्दर और शिक्षाप्रद कहानी लिख रहा हूँ।
एक बार की बात है। गर्मी के दिन थे। कड़कती धूप में खाने की तलाश में बाहर निकली हुई एक चींटी को बहुत प्यास लगी हुई थी। वो चींटी पानी की तलाश करते करते एक नदी के किनारे पहुंच गयी।
नदी में पानी पीने के लिए चींटी एक छोटी सी चट्टान पर चढ़ गयी। चींटी चट्टान के ऊपर चढ़कर नदी का पानी पिने की कोशिश कर रही थी पर वो चींटी चट्टान से फिसल गयी और फिसलते हुए नदी में जा गिरी। पानी का वहाव बहुत ही ज्यादा तेज़ था जिस कारण वो चींटी नदी में पानी के ऊपर बहने लगी।
नदी के पास ही एक पेड़ पर एक कबूतर बैठा हुआ था और वह ये सब देख रहा था । कबूतर ने चींटी को चट्टान से नदी में गिरते हुए देख लिया।

कबूतर ने जल्दी से उसी पेड़ से एक पत्ता तोडा और नदी में चींटी के करीब फेंक दिया। चींटी पत्ते के ऊपर चढ़ गयी। कुछ ही देर में पत्ता पानी में बहते बहते नदी के किनारे लगा। तब चींटी पत्ते से उतर कर सूखी जमीं पर आ गयी। चींटी ने पेड़ के ऊपर बैठे कबूतर की तरफ देखी और उस कबूतर को धन्यबाद दिया।
उसी दिन शाम को एक शिकारी अपना जाल लेके कबूतर को पकड़ने आया।
कबूतर पेड़ के ऊपर बड़े मजे से आराम कर रहा था और उसको शिकारी के आने का कोई अंदाजा ही नहीं था। चींटी ने उस शिकारी को देख लिया और जल्दी से पास जाके शिकारी के पॉंव पर जोर से काटा।
चींटी के काटने के कारण शिकारी की चीखने लगा। शिकारी की चीख सुनकर कबूतर जाग गया और शिकारी को पेड़ के निचे देख कर उड़ गया।
Moral of Story : कर भला तो हो भला। अगर आप दुसरो के साथ अच्छा करोगे तो आपके साथ भी अच्छा ही होगा।
आपलोगो को ये चींटी और कबूतर की Beautiful Hindi Moral Story कैसी लगी, निचे कमेंट करके बताये। धन्यवाद।
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